क्यूँ बदलता है इंसान

मोहब्बत हो जाये ख़ुदाह् को
कि दिल भी टूट जाये उसका
वो ये समझे कि दिल वाले
पत्थर नहीं होते!

कोई इश्क़ जलता है
कहीं आँखें पिघलती हैं
जो झटके से रो जाते थे
फिर नहीं पिघलते हैं

वो कसमें वो वादे
वो रंगीन इरादे
वो मासूम मोहब्बत
वो सपनों के पुलिंदे
फौलाद बने फिरते हैं
कल के नन्हे परिंदे

मोहब्बत बदलती है
जज़्बात जलते हैं
जो सुहाने लगा करते थे
वो अल्फ़ाज़ खलते हैं

मैं नास्तिक नहीं ख़ुदाह्
पर ज़माने से पहले
तेरे इंसान बदलते हैं

तेरी दुनिया के आगे
रिश्ते झुकते हैं
निगाहें बदलती हैं
दिखावे की कला से
हकीक़त चूक जाती है
तुझे न मानना
मुमकिन नहीं ख़ुदाह् पर
तेरी इबादत से पहले
दिल की शहादत झुकती है

सपने बदलते हैं
दुनिया बदलती है
अपने बदलते है
आदमियत बदलती है
मैं पूछूँ की ख़ुदाह्
क्या तेरी जन्नत भी
यूँ ही चलती है?

नज़रें बदलती हैं
नज़ारे बदलते हैं
जो जीने की वजह थे
वो सहारे बदलते हैं
यूँ कहूँ की ख़ुदाह्
तेरी क़यामत से पहले
कई क़यामत घटती हैं

कोई दरिया सिमट जाये
कहीं कुदरत पलट जाये
जो ख्वाबों से परे है
मुझे मेरा इश्क़ मिल जाये
तो मैं भी मानूँ की ख़ुदाह् तू
पत्थर नहीं होता

इक आस जगा दे मुझमें
इक दिया दिखा दे मुझको
जो खो गया मुझसे
मेरा ज़मीर मिला दे मुझको

तो मैं भी जानूँ ख़ुदाह् की
ये दुनिया यूँ ही नहीं चलती
कोई मकसद रहा होगा
तभी तूने ऐ दाता इस दिल को
पत्थर किया होगा
                          — Neeyo Sword

Neeyo Sword

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