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मेरा आसमान

तू मुमकिन नहीं मुझमें कभी 
मैं खोया हुआ हूँ आज 

तू रो रही होगी कहीं पर 

मैं क्यूँ सोया हुआ हूँ आज?
हो गए कई साल 

लेकिन आग अब भी जलती है

है पत्थर हुआ ये दिल मेरा 

पर चोट अब भी लगती है
हैं सब शुमार मेरे सफर में 

फिर भी कमी सी खलती है

तू शामिल नहीं मुझमें कहीं भी 

फिर क्यूँ अपनी सी लगती है?
हैं दूरियां हैं फांसले 

फिर भी अडिग हैं हौसले

तेरे सफर में राह बनकर 

हम आ गए तो?

सोच ले!
कि दुनिया बड़ी है

यहाँ हर इंसान बिकता है

इंसान चाहे सौ बिके 

पर ना इश्क सस्ता है

कि दुनिया बड़ी है

हर मोड़ पर एक जहान् बसता है

पर इस जहान् में जिस जगह पर 

तू बसे मेरा कारवाँ 

तू नजरें उठा कर देखे कहीं 

जो दिखे  ….मेरा आसमान

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